हमारे श्री महाराज जी | Hamare Shri Maharaj Ji

हमारे श्री महाराज जी | Hamare Shri Maharaj Ji Book/Pustak PDF Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

परम पूज्यपाद श्रीमहाराजजीकी जीवनकथा लिखी जाय। परन्तु वह काम हो कैसे? हमारे पास ऐसा कोई साधन नहीं था जिससे हम उनके प्रारम्भिक जीवनका विवरण संकलित कर सकें।

तब ने उनसे ही पूछ-पूछकर कुछ बातें लिखनी आरम्भ की परम पालु तो वे ही मैं जो पूछता बता देते थे। इस प्रकार की उन्हींकी पासे हम उनके विषयमकुछ सामग्री सञ्चित करने में समर्थ हुए।

पीछे यथासमय मैंने उन्हें क्रमबद्ध करके लिखना आरम्भ किया और प्रायः सौ पृष्ठ लिख भी लिये। किन्तु फिर लेखनी रुक गयी और मुझे ऐसा अनुभव होने लगा कि मैं उनको जीवन कथा लिखनेका अधिकारी नहीं हूँ।

प्रत्येक कार्य किसी योग्य अधिकारी के द्वारा सम्पन्न होनेपर ही सफल होता है। सर्वान्तर्यामी हरि जिससे जो काम कराना चाहते हैं उसीके हृदयको उसके लिए प्रेरित करते हैं. और वहीं उसमें सफल भी होता है।

जीवकी सारी योग्यता उन्हींका तो कृपाप्रसाद है। उस समय तो चित्तमें कुछ निराशा-सी थी कि अब यह कार्य कैसे होगा ? क्योंकि श्रीमहाराजजीके भक्तपरिकरमें लेखनादिकी ओर किसी अन्य व्यक्तिको कोई प्रवृत्ति दिखायी नहीं देती थी।

परन्तु भगवत्कृपाके खेल तो बड़े अनूठे होते है। वह किससे कब क्या करायेगी- कुछ कहा नहीं जा सकता। सचमुच वह अघटनघटना-पटीयसी है। उसने यह अद्भुत लीला की हमारे परम प्रिय ब्रह्मचारी श्री अजयजीके हृदय में बैठकर

श्रीब्राह्मचारीजी जन्मतः आन्ध्रदेशीय है। तिलगू इनकी मातृभाषा है। हिन्दीका विधिवत् अध्यान इन्होंने कभी नहीं किया। पढ़ने और बोलने का तो अभ्यास है, परन्तु लिखना बिलकुल नहीं जानते।

हाँ, अंग्रेजोका अभ्यास है, परन्तु लिखना बिलकुल नहीं जानते हो, औरणका अभ्यास अवश्य है। तथापि भगवत्कृपाले . इन्हें भावसांत भरपूर प्राप्त है। श्रीगुरुदेव चरणों में इनको अटूट बढ़ा है। और भाषा ती भाषा अनुसरण करती है।

लेखक ब्रह्मचारी शिवानंद-Brahmachari Shivanand
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 626
Pdf साइज़64.1 MB
Categoryआत्मकथा(Biography)

हमारे श्री महाराज जी | Hamare Shri Maharaj Ji Book/Pustak PDF Free Download

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *