गीत मेरे स्वर तुम्हारे | Geet Mere Swar Tumhare

गीत मेरे स्वर तुम्हारे | Geet Mere Swar Tumhare Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

कालो गतों के सुक इशारों पर क्यों अनजाने में हो तुम भटक रहे, मेरे सपनों के पलने में आओ, अपनी पलकों की बोर तुम्हें डे ॥कहते हो आँधी को जवाब दूंगा,पर, पुरवैया में ही तुम सो जाते,

कहते हो, दूढ़ निकालू मा चन्दा, लेकिन चकमक तारों में खो जाते,भिनुक गौतों से हो कुछ मांग रहे, बे तो घायल हैं क्या तुमको देने, मेरे हग के दर्पण से कुछ माँगो तो मन का मुग्ध चकोर तुम्हें दे ह।

साँसों की पूंजी शेष हुई जाती, पर गीतों की जागीर हमारी है, অन्दक फूलों वे तुमने बेव बहुत पूजे, पूजो जीवित विश्वासों से इन्सानों को।पूजो, इन्सानों के तप-त्याग, तपस्या को,

पूजो, निदान के लिए नवीन समस्या को, बाकुल जीवन की कली कली मुसकाने दो,युग की बीणा पर नयी रागिनी गाने दो,मुर्दे पत्थर की भगवानी तो बहुत हुई, पूजो युग-पथ के जीवित नए निशानों को।

इन्सानों को, जो नई राह दिखनाता है, युग का, जग का, इति-अथ का भाग्य विधाता है, जिनके घर में सूरज उजियारा भरता है,विशि-दिशि में भर दो नए प्राण नव अणाई , फिर अंग-अंग,

नव-नव उमंग, नव अंगड़ाई, भर दो तुतन आलोक मनुज की आँखों में, नीले नभ का विस्तार हृदय की पाँखों में, हर पतक्षर को मधुमास चुनौती देता है, तुम चमन बना दो, मरघट को, सुनसानो को।

लेखक दिनेश भ्रमर-Dinesh Bhramar
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 64
Pdf साइज़5.6 MB
Categoryकाव्य(Poetry)

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