एक अनेक | Ek Anek

एक अनेक | Ek Anek Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

की हत्या कर दी और रोष से बचने के लिये ससकी ताण बरोबर दी। -कुछ सण पूर्व तक में भी भगध साम्राज्य का अमात्य चा । महाराज मं और इस विशाल मय शामाज्य की सेवा में था। समाद का विश्वासपात्र और साम्राज्य का शुभ चिन्तक पा…..

-इससे क्या होता है, सम्राट के पास ऐसे प्रमाण होंगे, जिससे आप पर लगाये गये आरोपों की पुष्टि होती होगी; तभी तो सम्राट् ने आपको तथा आपके पूरे परिवार को दोषी व्हराया है।-माँ टीक ही कहती है पिताजी । आपने महामात्य शकटार को अपने यहाँ प्रीतिभोज पर निमंत्रित किया था ।

-गत रात महामात्य हमारे घर आने वाले थे ।-किन्तु वह नहीं आया।या था । प्रहरी कहू रहा था; उसने महामंत्री शकटार को हमारे महालय में प्रवेश करते देखा था । प्रहरी का कहना है कि महामंत्री शकटार हमारे महालय के प्रवेश-द्वार पर अपने रथ से उतर गया और पैदल ही महालय की ओर चल दिया ।

हमारे अतिथि -क्ष में बह नहीं आया। रात्रि के पिछले पहर तक हम उसकी प्रतीक्षा करते रहे । -फिर हमारे ऊपर सन्देह क्यों किया गया तात् ? -प्रहरी की बातों से इतना तो प्रमाणित हो ही जाता है कि महामंत्री शबाटार गत रात्रि हमारे घर आये ये।

-विश्वास करो सुकेशी, मैंने उसकी हत्या नहीं की है। साभद का सन्देह निराधार है। शकटार ने अपनी हत्या आप की है। ऐसा भी कोई करता है तात् । सर्वचा नई बात कह रहे हैं तात् । ऐसा आप किस आधार पर कहते हैं वेव।

-लोकलाज से बचने के लिए उसने आरमह्या की है । अपने ज्येष्ठ पुत्र स्थूलभद्र के आचरणों से वह बहुत ही दुखी था। एक वारांगना उसके घर को कुलवधु बन कर आनेवाली है, जो वह नहीं पाइता था ।

लेखक बाबूराम लामगोडा-Baburam Lamagoda
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 254
Pdf साइज़23.5 MB
Categoryनाटक(Drama)

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