दुखी दुनिया | Dukhi Duniya

दुखी दुनिया | Dukhi Duniya Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

मि० कौशिक अपने ड्रेसिंग रूमसे चिल्लाये । मिस्टर कौशिक पल्निसे श्रक्सर अंग्रेजीमें ही बातचीत करते थे; क्योंकि वे बेहूदी हिंदुस्तानी भाषामें अपनी पत्नीको ‘डार्लिंग’, ‘डियर आदि शब्दोंसे संबोधित नहीं कर सकते थे ।

“जी हो, मैं आई कहकर पूरी तरह सजधज कर मिसेज़ कौशिकने अपने पतिके कमरे में हंसते हुए प्रवेश किया । बह एक उत्कृष्ट बंगलौरी साड़ी पहिने थीं, जिसका संदर लाल रंग सोनेके समान उनके कांतिपूर्ण शरीरपर बड़ा मला मालूम देता था।

पतिने देखते ही कहा, “प्रिये ! तुम कितनी सुंदर हो । लज्जासे मिसेज़ कौशिकके कपोल आर्क हो गए उसका सौंदर्य और भी खिल उठा।मोटर-साइकिल पोर्च में खड़ी ही थी। मि० कौशिकने अंगरेजी प्रथा नुसार परी को सहारा देकर ‘साइडकार’ में बैठाया और बोले “गुजराती दगसे साड़ी सिरफर ले लो, जिगसे वालों में धूल न पड़ने पावे ।”

स्वयं उन्होंने भी अपने सिरपर हैट जमा ली और रवाना हुए वाहर जाते समय वह हमेशा हैट पहनते थे ।फिट-फिट-फिट-फिट करते हुए दोनों पति-पत्नी पर्वतीपुर-मंगापटनम् रोढपर चले । लोकल बुद्ध का रास्ता था, कौन ध्यान देता है, कई गढ़े और खाइयां थीं स्वर ।

तहसील पिछड़ी हुई थी। लोगोंके लिए मोटर-साइकिल एक असा धारण चीज़ थी। बैलगाडियोंकी हटाने के लिए आधे मील से गाने बजाना पड़ता, तब कही लोग कुछ इधर-उधर होते; और कुछ तो यही विचार फरते रह जाते कि किस पटरीपर गाड़ी करनी चाहिए

। ज्योही असिस्टेंट बलेक्टर साहब अपनी पत्नी सहित यहाँसे गुजरे त्योहो लोगोंके झंड-के झंट राहपर र उनकी श्रीर श्राश्र्य- भरी नजरसे यों देखने लगे मानो वे किसी विचित्र परी को देख रहे हों।उनकी बोल-चाल और दंग अत्यंत मनोहर था। और हिंदुस्तानी मेहमानोसे तो यह बड़ी ही खुश होती थीं।

श्रीमती कौशिकसे बह बड़े प्रेमसे मिलीं । उनकी साड़ी उन्हें बहुत पसंद आई | “ठितनी सुंदर कसा चाहिये रेशम है। ये फूल और तुम्हारे 1. ये काले काले चाल! मेरे भी ऐसे बाल होते तो कितना अच्छा होता !

लेखक राजगोपालाचार्य चक्रवर्ती-Rajgopalacharya Chakravarti
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 100
Pdf साइज़3.3 MB
Categoryउपन्यास(Novel)

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