देवी चिंतन एवं उपयोगी मंत्र | Devi Chintan Avm Upyogi Manrta

देवी चिंतन एवं कुछ उपयोगी मंत्र | Devi Chintan Avm Kuchh Upyogi Manrta Book/Pustak PDF Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

मायाशक्ति और महाशक्ति

कोई-कोई कहते हैं कि इस मावाशक्तिका ही नाम महाशक्ति, प्रकृति विद्या, अविद्या, ज्ञान, अज्ञान आदि है, महाशक्ति पृथक् वस्तु नहीं है। सो उनका यह कथन भी एक दृष्टिसे सत्य ही है;

क्योंकि मायाशकि परमात्रूपा महाशक्तिकी ही शक्ति हैं और वही जीवोंके बाँधनेके लिये अज्ञ अविद्यारूपसे और उनकी बन्धन मुक्तिके लिये ज्ञान या विद्यारूपसे अपना स्वरूप प्रकट करती है, तब इनसे भिन्न कैसे रही?

हाँ, ओ मायाशक्तिको ही मानते हैं और महाशक्तिका कोई अस्तित्व ही नहीं मानते थे तो मायाके अधिष्ठान ब्रह्मको ही अस्वीकार करते हैं, इसलिये वे अवश्य ही मायाके चकरमें पड़े हुए हैं।

निर्गुण और सगुण

कोई इस परमात्मरूपा महाशक्तिको निर्गुण कहते हैं और कोई गुण ये दोनों बातें भी ठीक हैं, क्योंकि उस एकके ही तो ये दो नाम है। जन्म मायाशक्ति क्रियाशील रहती है,

तब उसका अधिष्ठान महाशक्ति सगुण कहलाती है। और जब वह महाशक्किमें मिली रहती है, तब महाशक्ति निर्गुण हैं। इन अनिर्वचनीया परमात्मरूपा महाशक्किमें परस्परविरोधी गुणोंका नित्य समय है।

जिस समय निर्गुण हैं, उस समय भी उनमें गुणमयी मायाकछिपी हुई मौजूद है और जब ये सगुण कहलाती है उस समय भी ये गुणमयी मायाशक्तिकी अधीश्र और सर्वत्रस्वतन्त्र होनेसे वस्तुतः निर्गुण ही हैं।

स्वरूपम अचिन्य अनन्त दिव्य गुणोंसे नित्य विभूषित होनेसे वे गुण हैं और ये दिव्य गुण उनके स्वरूपसे अभिन्न होने के कारण वहीं वस्तुतः निर्गुण भी है, कि उनमें निर्गुण और सगुण दोनों लक्षण सभी समय वर्तमान है।

शक्ति और शक्तिमान्

कोई कोई कहते हैं कि शुद्ध ब्रह्म माया नहीं रह सकती, माया रही तो वह शुद्ध कैसे? बात समझनेको है। शक्ति कभी शक्तिमान पृथक रह सकती। यदि शक्ति नहीं है तो उसका शक्तिमान नाम नहीं हो सकता और शक्ति हो तो शक्ति रहे कैसे?

लेखक हनुमान प्रसाद-Hanuman Prasad
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 94
Pdf साइज़1 MB
Categoryधार्मिक(Religious)

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