ब्रुह्धवनजातकम | Bruhdhvanajatakam

ब्रुह्धवनजातकम | Bruhdhvanajatakam Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

मंगळ देखने हों तो जितने ग्रह हो उतनेही सगे भाई बहन हो वा जितने ग्रह देखते हो उतने जानना ॥ ३ ॥ कुजेन ह्े रविजे तनूजा नश्पन्वि जाता: सहजा हि तस्य ।से च तस्पिन्युरुमार्गवात्यां शुश्रच्छु्न स्वादनुवे्ड नूनम् ।॥ ४ ॥

जो मंगल शनिको देखे तो उत्पन्न हुए आता नष्ट हों और खुरु भार्गव देखते हों तो भाइयोंका अवश्पही कुशक हो । ४॥सौम्येन भूमीतमयेन इष्टः करोति इर्टिं रविजोऽनुआनाम् । शशांक्र्गे सहजे कुजेन दृष्टे सरोगाः सहजा भवेयु:॥ ५ ॥

सौम्यग्रह तवा मंगल शनिको देखते हो तो भाइयोंकी उत्तम दृष्टिदो और चन्द्रवर्गमें मंगलकी दृष्टि हो तो भाई रोगसे युक्त होते हैं॥५॥ दिवामणी पुण्यमृह्े ्वमेडे सैदेइ एवानुअजीवितस्य एकः कदाचि विरजीवितथ भाता मत्रदपतिना सुमानः ॥ ६ ॥

जो सूर्य पुग्यल्यानमें व अपने घरमें स्थित दो तो उसके अनुनाक जीवनमें सन्देह हो। कदाचित् एक हो, वह चिरजीवी और राजाके समान होता है ॥६॥चन्द्रपाः पास्ुक्त सहजस्यो यदा भमवेद ।बातृनाशक करो योगो यदि नो दीक्षितः शुभैः । ७ ॥

जो चन्द्रमा पापयुक्त सहज स्थान है। तो यह भ्रातनाशक योग होता है याद शुभ ग्रह न देखते हो तो ॥ ॥ यदि वलैः स इजे च खला बहाः शुभप्रहः महिताश्च विलोकिताः ।नहि भवन्ति महोदरबान्धवा बहुविधाप्रनपक्षविषातयु कु ॥ ८ ॥ नो सहज स्थानम खलपद शुभ ब्रहमसि युक्त वा देखे जाते हैं।

उसके सहोदर और बांधव न हो तथा बहुत प्यार से वड़े भाइयोंके पक्षके विधातमे युक्त होता है ॥ ८ ॥जो सहज स्थान अपने स्वामी शुभ ग्रहसे युक्त वा देखा गया हो तो ज्येष्ठ सहोदरका सुखभोगी होता है और जो अपने स्वामीसे युक्त तथा शुभ ग्रहोंकी दृष्टि न हो तो सहोदरोंका किया सुख नहीं होता ॥९॥

यदि खलाः प्रपलाः ख लमध्यगं खलयुतेक्षितमत्रजई तदा । नहि कनिष्ठसहोदरजं सुखं भवति ज्येष्ठसुखं न तु जायते ॥ १० ॥जो करप्रह प्रबल हों और उक्तभाव पापग्रहोंके मध्यमें स्थित हों तथा पापग्रहोंसे युक्त वा दृष्ट हो तो बडे भाईका नाशक हो तथा छोटे सहोदर भाईसे भी मुख न हो, ज्येष्टसे मुख हो ।

लेखक गंगाविष्णु श्रीकृष्णदास-Gangavishnu Shrikrishnadas
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 158
Pdf साइज़23.7 MB
Categoryधार्मिक(Religious)

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