भाईजी पावन स्मरण | Bhaiji Pawan Smaran

भाईजी पावन स्मरण | Bhaiji Pawan Smaran Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

[श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार आधुनिक भारतकी महत्तम विभूतियोंमें हैं। हमने विदेशी दासतासे मुक्ति प्राप्त की, किंतु हमारी संस्कृतिकी पुन स्थापना के हेतु पर्याप्त प्रयत्न नहीं किये गये,

जिसके मूल आधार सादगी, सेवा, त्याग, सदाचार एवं आध्यात्मिकता है। विद्यालयों और कालिजोंमें न तो धर्मकी, न दर्शनकी और न सदा चारकी ही शिक्षा दी जाती है।

धर्मनिरपेक्ष राज्यका गलत अर्थ लगा लिया गया है, जिसके फलस्वरूप शिक्षण संस्थाओंके पाठयक्रमोंसे इन विषयोंको अलग रखा गया है। हमारे बच्चे भौतिक सभ्यतामें पल रहे हैं

सारी शिक्षा एक उद्देश्यकी ओर प्रेरित है और वह है–नवयुवकोंको जीवन-निर्वाहका साधन सुलभ करना । सम्पूर्ण विज्ञानका विनियोग मनुष्यके शारीरिक सुख-साधनोंको बढ़ाने में हो रहा है ।

हम दो विरोधी सभ्यताओंके संघर्षसे घिरे हुए हैं पश्चिमी जडवादी सभ्यता हमको तेजीसे अभिभूत करती जा रही है और इसने हमारी आध्यात्मिक संस्कृतिकी नींवतक हिला दिया है ।

मनुष्य एक बार पुनः ‘जिसकी लाठी उसकी भैस के सिद्धान्तको अपना रहा है । हिंसा, जोवन-संघर्ष, मत्स्य-न्याय, बलवान्दारा दुर्बलका पीड़न दैनिक व्यवहारके अङ्ग बन गये हैं ।

यद्यपि सत्य, अहिंसा तथा आध्यात्मिक शक्तिको अपने संघर्षका आधार बनाकर हमने शक्तिशाली ब्रिटिश साम्राज्यसे अपनी स्वतन्त्रता प्राप्त की है, हम देशके भीतर घरेलू

शान्ति बनाये रखने के लिये तथा बाह्य आक्रमणसे अपनी स्वतन्त्रताको बचानेके हेतु एक दूसरेके विरुद्ध हिसार का उपयोग कर रहे हैं । आध्यात्मिक शक्तिकी क्षमतापर हमारी

आस्था प्रायः लुप्त हो चुकी है तथा शस्त्रास्त्रों एवं पाशविक बलमें हमारी आस्था हो गयी है। चर्चा तो की जात आदर्शोका प्रचार कर श्रीपोद्दारने बहुमूल्य सेवा की है। गीताके अनुसार

विश्व एक है और वह भगवान्से भित्र कुछ नहीं है। हिंदूधर्मका वास्तविक ध्येय है विश्वमें भगवद्दर्शन करना और अनासक्त भावसे जीवमात्रकी सेवाके द्वारा भगवान्की आराधना, करना।

लेखक Gita Press
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 769
Pdf साइज़126.8 MB
Categoryआत्मकथा(Biography)

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