भगवान सदा तुम्हारे साथ हैं | Bhagwan Sada Tumhare Saath Hain

भगवान सदा तुम्हारे साथ हैं | Bhagwan Sada Tumhare Saath Hain Book/Pustak PDF Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

‘शिव का निवेदन’

मन तरङ्गों का समुद्र है। ‘शिव’ के मनमें भी अनेक तरङ्गे उठती हैं, उन्होंमेंसे कुछ तरङ्गे लिपिबद्ध भी हो जाती है और उन्हीं अक्षराकारमें परिणत तरङ्गोंका यह एक छोटा-सा संग्रह प्रकाशित हो रहा है।

इस संग्रहमें पुररुक्ति और और क्रमभङ्ग दोष दिखायी देंगे, तरङ्गे ही जो ठहरीं। यह सत्य है कि तरङ्गोंके पीछे भी एक नियम काम करता है और वहाँ भी एक नियमित क्रमधारा ही चलती है,

परन्तु उसे हम अपनी इन आँखोंसे देख नहीं पाते। हमें तो हवाके झोंकोंके साथ-साथ तरङ्गोंके भी अनेकों क्रमहीन और अनियमित रूप दीख पड़ते हैं। सम्भव है

सूक्ष्मदृष्टि से देखनेवाले पुरुषोंको इस तरङ्ग संग्रहमें भी किसी नियमका रूप दिखलायी दे। ‘शिव’ को इससे कोई मतलब नहीं। ‘शिव’ ने प्रकाशकों के कहनेसे इतना ही किया कि इधर-उधर बिखरे वाक्योंको एकत्रकर उनपर कुछ शीर्षक बैठा दिये हैं।

पाठकोंका इससे कोई लाभ या मनोरजंन होगा या नहीं, इस बातको ‘शिव’ नहीं जानता। यह दूसरे भागका निवेदन है इसी निवेदकके साथ यह तीसरा भाग प्रकाशित हो रहा है।

आठवें संस्करणके विषय में निवेदन

“कल्याण-कुन्ज भाग-3” का आठवाँ संस्करण पाठकों की सेवामें प्रस्तुत करते हमें प्रसन्नता हो रही है। “कल्याण” कामी महानुभावोंने इस पुस्तिकाका जो आदर किया है, वह अभिनन्दनीय है।

इस पुस्तिकाके रूपमें किन महानुभावके पूत हृदयके उदात्त विचार हैं, यह जाननेकी अभिलाषा पाठकोंके मनमें वर्षोंसे रही है। अनेकों पाठकोंने व्यक्तिगत रूपसे पत्र लिखकर हमसे यह पूछा है और हमने उन्हें इसका स्पष्टीकरण भी किया है,

परन्तु खले रूपमें यह बात कभी प्रकट नहीं की गयी कि ये विचार हमारे परम श्रद्धास्पद भाईजी श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दारके पावन हृदयके उद्दार हैं, जो उन्होंने “कल्याण” मासिक पत्रमें प्रतिमास “कल्याण” शीर्षकसे प्रकाशित किये थे।

लेखक Gita Press
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 74
Pdf साइज़1 MB
Categoryसाहित्य(Literature)

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