अष्टछाप तथा ताल्लपाक के कवियों का तुलनात्मक अध्ययन

अष्टछाप तथा ताल्लपाक के कवियों का तुलनात्मक अध्ययन Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

उत्तर भारत में मुसलमानी आक्रमणों को रोकने के लिए राजपूत मीरों

नै पूरा-पूरा प्रयत्न किया था किन्तु उस समय सिन्धु प्रदेश को छोड़कर सारा उत्तर भारत माउ छोटे बड़े राण्यों में विभक्त हो गया था। ये-नाक मुक्ति, बघेलखण्ड, मालबा, अणहिलबाड़ा, शाकंभरी, ग्वालियर, कन्नौज एवं बिहार-बंगाल ।

किन्तु उनमें आपसी कूट के कारण और व्यापक राष्ट्रीयता के अभाव के कारण शत्रु के सामने एक संगठित रूप में सड़े न हो सके । फलतः देश में मुसलमानों की सत्ता जम गयी। दसवीं शताब्दी के अन्त में महमूद गजनवी और शहाबुद्दीन गौरी के आक्रमणों से चारों ओर [त्राहित्तराहि मच गयी थी ।

आपसी फूट के ही कारण अत्यन्त शक्तिशाली राजा पृथ्वीराज चौहान एवं जयचंद भी क्रमशः गौरी और कुतुबुद्दीन ऐबक के हाथों से हत्या कर दिये गये थे। मोहम्मद गौरी ने जिन प्रदेशों को जीता, उन पर सन् 1206 में कुतुबुद्दीन ने गुलामवंशोय शासन की नींव डाली।

बलवन इस वंश का प्रसिद्ध सुलतान था जिसने साम्राज्य का विस्तार भी किया। किन्तु उत्तराधिकारियों की आयोग्यता के कारण शासन स्रिलजो बंशजों के हाथ में चला गया। “अलाउद्दीन खिलजी (सन् 1296) तथा मुहम्मद ने अपने सतत प्रयासों से केन्द्रीय शासन को सुदृढ़ बना कर अपनी दूरदर्शिता का परिचय दिया ।

किन्तु उनके आँख मूंदते हो सब कुछ चौपट हो गया फलतः चौदहवीं तथा पंद्रहवीं शताब्दियों में बहुत से मुसलमानों तथा हिन्दुओं के प्रादेशिक राज्य उठ खड़े हुए अलाउद्दीन के समय ही दक्षिण में मुसलमानों का प्रवेश हुआ । सन् 1320 में दिल्ली की गद्दी पर गयासुद्दीन तुगलक बैठा ।

उसने शासन की अव्यवस्था को सुधार कर बंगाल, महाराष्ट्र एवं आंध्र प्रान्तों पर अपना राज्य स्थापित कर लिया ।हुमायूं, अकबर, जहागार तथा साहबहाना राजनाातक दाण्टसमामानक काम बिग्ध, अशान्त तथा संघर्षमय काल था।”

लेखक आर.सुमन लत्ता-R.Suman Latta
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 436
Pdf साइज़22.2 MB
Categoryसाहित्य(Literature)

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