असामान्य मनोविज्ञान | Asamanya Manovigyan

असामान्य मनोविज्ञान | Asamanya Manovigyan Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

असामान्य मनोविज्ञान पर विचार करते समय स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठ खड़ा होता है कि असामान्यता ( Abnormality ) क्या है और मनोविज्ञान क्या है ? दूसरे प्रश्न का उत्तर तो सामान्य मनोविज्ञान के अन्तर्गत दिया जा चुका है ; किन्तु असामान्यता के सम्बन्ध में युगों से विवाद चलता आ रहा है।

पूर्व इसके कि इस विवाद पर विचार किया जाय एक बाक्य मे यह कह देना अच्छा होगा कि असामान्य मनोविज्ञान भी मनोविज्ञान की अन्य शाखाओं की तरह एक विधायक या समर्थक विज्ञान (Positive Science) है जो जीव के असामान्य एव विचित्र व्यवहारों और अनुभूतियो का अध्ययन नियत्रित अवस्था में करता है ।

जहाँ तक असामान्य ( Abnormal ) पद के संक्षिप्त (Precised) और वैज्ञानिक अर्थ का प्रश्न है, विभिन्न विद्वानों में मतैक्य नहीं है । इसके लिए मुख्य रूप से दो कारण जिम्मेदार हैं। पहला तो यह कि असामान्य मनोविज्ञान का क्षेत्र कुछ इतना विस्तृत हो गया है कि इसे इससे मितते जुलते कुछ अन्य क्षेत्रो से बिल्कुल अलग करना बहुत मुश्किल है ।

उदाहरणार्थ, मनोविकृति-विज्ञान ( PsychopathologY ), मनोचिकित्सा-विज्ञान (Psychiatry),औपचारिक मनोविज्ञान (Clinical Psychology ) आदि का उल्लेख इस सम्बन्ध में किया जा सकता है; जिनसे असामान्य मनो विज्ञान की सीमा को पूर्णतः अलग करना अत्यंत ही कठिन है,

यद्यपि सभी के अपने अलग-अलग लक्ष्य, आलोच्य विषय तथा लक्ष्यपूर्ति की विधियां हैं। दूसरी कारण है, दृष्टिकोण का अन्तर । यदि एक ही वस्तु को विभिन्न दिशाओ से देखा जाय तो कुछ अन्तर स्वाभाविक है। अतः चन्द मुख्य दृष्टिकोण पर विचार करता यहाँ आवश्यक सा हो जाता है

असामान्यता का नैतिक ( Ethical ) दृष्टिकोण भी मान्य नहीं है ; क्योंकि इसके अनुसार जो मनुष्य उचित-अनुचित का ध्यान रखकर व्यवहार करता है वह तो सामान्य है। लेकिन जिसे इसका विचार नहीं है वह असामान्य है । अतएव इस विचारधारा के अनुसार अनैतिक (Immoral ) व्यवहार ही असामान्य है।

लेखक जगदानन्द पाण्डेय-Jagdanand Pandey
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 348
Pdf साइज़18.7 MB
Categoryमनोवैज्ञानिक(Psychological)

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