आचार्य सायण और माधव | Achary Sayan Aur Madhav

आचार्य सायण और माधव | Achary Sayan Aur Madhav Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

अर्थ मीमांसा का परिचायक यही अन्य सब से प्राचीन माना जाता है । इसमें वेद मंत्रो की समुचित व्याख्या भी है, परन्तु इतने कम मंत्रो की, कि विपुल वेदराशि का एक अत्यन्त स्वल्प अंश ही इसके द्वारा गतार्थ होता है।

इस प्रकार यास्क के निरुक्त के द्वारा वेदार्थ मीमासा पद्धति का मार्ग प्रदर्शन मात्र होता है, परन्तु इतनी भी सहायता बड़े महत्व की है।अब तक वेद मन्त्रो के सहायक कतिपय व्याख्या ग्रन्थों का वर्णन किया गया है ।

प्राचीन काल के पण्डितजन इन्ही अन्य की सहायता से वेद मन्त्रो के अर्थ को समझ लेते ये । प्राचीन जीवित परम्परा से वे पर्यास मात्रा में परिचित मे, अतः परम्परा के श्राधार पर वेद के पडङ्गो की अमूल्य सहा

यता से चे अनायास ही वेदार्थ को समझ लेते रहे होगे, ऐसा अनुमान करना अनुपयुक्त नही प्रतीत होता । परन्तु समय ने पलटा खाया, बुद्ध धर्म के प्रचार के साथ साथ वैदिक धर्म तथा वैदिक निष्ठा का हास होने लगा।

राजाश्रय प्राप्त हो जाने से बुद्ध धर्म अब एक प्रान्तीय धर्म न रहा, बद्कि समस्त भारत में तथा उसके बाहर भी इसके मानने वालो की संग्या बढ़ने लगी और देखते ही देखते इसने वैदिक धर्म को दबाकर अपना प्रभुत्व सन्य संसार में जमाया।

वैदिक घन समय समय पर अपना सिर उठाया करता था, परन्तु अनुकूल वातावरण न मिलने के कारण इसके प्रभाव में स्थाविता का अभाव बहुत दिनो तक बना रहा । अन्ततोगत्वा विक्रम फी चतुर्थ शताब्दी में उत्तर भारत

लेखक बलदेव उपाध्याय-Baldev Upadhyay
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 239
Pdf साइज़11.6 MB
Categoryसाहित्य(Literature)

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