आर्थिक योजनाएं और गांधीजी | Aarthik Yojnaye Aur Gandhiji

आर्थिक योजनाएं और गांधीजी | Aarthik Yojnaye Aur Gandhiji Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

दैहिक, दैविक, भौतिक छापत्तियों में भी उसे सुरक्षा मिल सके। इसीलिए इसके अन्तर्गत को बनायें चलाई जाती हैं उनमें र्ण उपम उचित मजदूरी तथा अन्य उचित पुरस्कार की योजना बनाई जाती है। कल्याणकारी राज्य भी इस ओर तीव्रता से बढ़ रहे हैं ।

दूंजीवादी तथा ‘पासिस्टयादी राज्य सब प्रकार के पुरस्कार का उचित स्थान निश्चित करते है। जीवन मान को ऊँचा उठाना अाज अनेकों योजनाओं का ध्येय है।(५) सामाजिक सुरक्षा-आज जागरण का युग है। सामाजिक असमानता, जिसमें अमीरों की आवश्यकताओं का विशेष

ध्यान तथा गरीचों की आवश्यक आवश्यकताओं की तनिक भी परवाह नहीं की जाती, सबको खलती है। इससे समता के युग को धक्का पहुँचता है । अमीर और गरीब सबको आवश्यकताओं में ये भेद न हों और न उनके कारण समाज में खलने बाली विषमता ही हो ।

साथ ही साथ आज न्याय की भाषना का भी प्रसार हो रहा है, क्योंकि मानव मूल्य की व्यापकता पर भी ध्यान आकृष्ट होने लगा है। जन जागरण, शिक्षा प्रसार, साम्यवादी भावना, तथा मानव मूल्य की प्रतिष्ठा फि फायर व रूप न्याय की भावना मो प्रबल होती जा रही है।

मनुष्य में दूसरे असहाय निर्थल मनुष्य के प्रति कर्तव्य की चेतना जाग रही है। सबको बराबर आर्थिक साधन मिलना चाहिए और सबको जीवित रहने का अधिकार है । इतनी विषमता नहीं रहनी चाहिए यद्यपि थोड़ी सी विषमता का रहना स्वाभाविक ही है।

इसो लिए रूस ने भी प्रत्येक से उसकी योग्यता के अनुसार क्या प्रत्येक को उसकी आवश्यकता के अनुसार के स्थान पर, प्रत्येक से उसकी योग्यता के अनुसार और प्रत्येक को उसके कार्य के अनुसार, का नारा लगाना श्रारम कर दिया है ।

लेखक दुधनाथ चतुर्वेदी-Dudhnath Chaturvedi
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 98
Pdf साइज़7.9 MB
Categoryअर्थशास्त्र(Economy)

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